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हरियाणा में 10 नई IMT बनाने की तैयारी! जापान-सिंगापुर के बाद अब दक्षिण कोरिया पर राव नरबीर सिंह का फोकस

चंडीगढ़। हरियाणा में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए सरकार अब वैश्विक कंपनियों पर फोकस कर रही है। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह की रणनीति प्रदेश को केवल गुरुग्राम जैसे बड़े औद्योगिक और आईटी केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय सभी जिलों में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की है। इसी दिशा में 10 नई इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप (IMT) विकसित करने की सोच के साथ विदेशी निवेशकों को हरियाणा में निवेश के लिए आकर्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार का जोर नए उद्योग स्थापित करने, मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार करने और प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर तैयार करने पर है। उद्योग मंत्री का प्रयास है कि औद्योगिक विकास का लाभ अलग-अलग जिलों तक पहुंचे और युवाओं को काम की तलाश में अपने घरों से दूर न जाना पड़े।

हरियाणा में 10 नई IMT विकसित करने की योजना

राव नरबीर सिंह हरियाणा में 10 नई इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप विकसित करने की सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। इसका उद्देश्य केवल औद्योगिक जमीन का विस्तार करना नहीं, बल्कि उद्योगों के साथ रोजगार, व्यापार और सहायक सेवाओं के लिए भी मजबूत आधार तैयार करना है।

इस रणनीति के तहत विदेशी दौरों के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी साथ ले जाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और बड़े औद्योगिक समूहों के सामने हरियाणा की औद्योगिक संभावनाएं रखी जा सकें। सरकार की कोशिश है कि निवेश के प्रस्तावों को औद्योगिक परियोजनाओं में बदला जाए और उनका लाभ प्रदेश के युवाओं तक पहुंचे।

हालांकि, 10 नई IMT के स्थान, समयसीमा और विकास के चरणों से संबंधित विस्तृत जानकारी अभी अलग से सामने आना बाकी है।

जापान से ₹3,900 करोड़, सिंगापुर से ₹5,500 करोड़ के निवेश की पहल

विदेशी निवेश आकर्षित करने के अभियान के तहत हरियाणा की ओर से जापान और सिंगापुर में निवेश की संभावनाएं तलाशने के प्रयास किए गए। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, जापान से करीब ₹3,900 करोड़ और सिंगापुर से करीब ₹5,500 करोड़ के निवेश की पहल हुई है।

सरकार का उद्देश्य इन निवेशों को प्रदेश में नए औद्योगिक प्रतिष्ठानों की स्थापना, मौजूदा इकाइयों के विस्तार और रोजगार सृजन से जोड़ना है। निवेश की घोषणाओं और प्रस्तावों का वास्तविक आर्थिक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि संबंधित परियोजनाएं किस गति से आगे बढ़ती हैं और उनमें कितना निवेश धरातल पर उतरता है।

सिंगापुर दौरे के दौरान राव नरबीर सिंह ने हरियाणा और पंजाब मूल के उद्योगपतियों से भी संवाद किया। उन्हें अपने गृह प्रदेश में उद्योग स्थापित करने और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने में भागीदार बनने का निमंत्रण दिया गया।

अब दक्षिण कोरिया की कंपनियों पर नजर

जापान और सिंगापुर के बाद अब हरियाणा की नजर रिपब्लिक ऑफ कोरिया यानी दक्षिण कोरिया की कंपनियों पर है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राव नरबीर सिंह 19 से 22 अक्टूबर तक दक्षिण कोरिया के दौरे की तैयारी कर रहे हैं।

इस दौरे में दक्षिण कोरिया की औद्योगिक क्षमता, वहां की कंपनियों के साथ संभावित निवेश और औद्योगिक सहयोग पर ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। दक्षिण कोरिया इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, मशीनरी और आधुनिक विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में मजबूत औद्योगिक आधार रखता है। ऐसे में हरियाणा के लिए वहां की कंपनियों के साथ सहयोग की संभावनाएं तलाशना औद्योगिक विस्तार की रणनीति का अहम हिस्सा हो सकता है।

उद्योग मंत्री बोले—युवाओं को रोजगार दिलाना प्राथमिकता

राव नरबीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश में उद्योगों को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के अधिक अवसर पैदा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। विदेशी दौरों का उद्देश्य दुनिया के बड़े उद्योगपतियों और कंपनियों को हरियाणा में निवेश के लिए आमंत्रित करना है।

उनके मुताबिक, प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने से नए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। सरकार की कोशिश है कि निवेश का लाभ हरियाणा के अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचे और युवाओं को अपने घर के नजदीक रोजगार के अवसर मिलें।

निवेश से रोजगार तक पहुंचना होगी असली चुनौती

हरियाणा में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने और विदेशी कंपनियों को आकर्षित करने की रणनीति से निवेश की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। लेकिन इसका वास्तविक असर परियोजनाओं की स्थापना, उत्पादन शुरू होने, स्थानीय युवाओं के कौशल विकास और कंपनियों में भर्ती जैसे चरणों पर निर्भर करेगा।

यदि प्रस्तावित निवेश समय पर जमीन पर उतरता है और नई औद्योगिक इकाइयां अलग-अलग जिलों में स्थापित होती हैं, तो इससे रोजगार के साथ परिवहन, लॉजिस्टिक्स, निर्माण और अन्य सहायक क्षेत्रों को भी फायदा मिल सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विदेशी दौरों से मिले निवेश प्रस्ताव कितनी तेजी से वास्तविक परियोजनाओं में बदलते हैं।

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