Haryana

हरियाणा में औद्योगिक निवेश से खुलेंगे रोजगार के नए द्वार! 6 IMT में हजारों एकड़ जमीन पर उद्योगों के विस्तार की तैयारी

चंडीगढ़। हरियाणा औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में औद्योगिक मॉडल टाउनशिप (IMT) का विस्तार, आधुनिक बुनियादी ढांचे का विकास और बड़ी कंपनियों की दिलचस्पी निवेश की संभावनाओं को नई दिशा दे रही है। इससे न केवल औद्योगिक उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, बल्कि परिवहन, लॉजिस्टिक्स, भंडारण, निर्माण और अन्य सहायक सेवाओं में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (HSIIDC) की ओर से विकसित औद्योगिक क्षेत्रों को केवल उत्पादन केंद्रों तक सीमित रखने के बजाय उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक्स और श्रमिक सुविधाओं से युक्त समग्र औद्योगिक केंद्रों के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल के अनुसार, मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में प्रदेश में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में नए उद्योगों की स्थापना और विदेशी निवेश की संभावनाएं तलाशने के लिए हरियाणा के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में सिंगापुर का दौरा किया।

छह प्रमुख IMT में औद्योगिक विस्तार की तैयारी

हरियाणा में छह प्रमुख औद्योगिक मॉडल टाउनशिप विकसित की गई हैं। इन क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना और विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर जमीन उपलब्ध कराई गई है।

  • IMT मानेसर: लगभग 4,000 एकड़
  • IMT रोहतक: लगभग 3,600 एकड़
  • IMT बावल: लगभग 3,300 एकड़
  • IMT खरखौदा: लगभग 3,200 एकड़
  • IMT फरीदाबाद: लगभग 1,800 एकड़
  • IMT सोहना: लगभग 1,500 एकड़

इन औद्योगिक क्षेत्रों का उद्देश्य कंपनियों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना और निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना है। हालांकि, इन क्षेत्रों में उपलब्ध कुल जमीन और वास्तव में आवंटित या उपयोग में लाई जा रही जमीन के आंकड़े अलग हो सकते हैं।

उद्योगों को आकर्षित करने के लिए क्या है सरकार की रणनीति?

डॉ. अमित अग्रवाल के मुताबिक, राज्य की औद्योगिक नीति का जोर केवल कंपनियों को जमीन उपलब्ध कराने पर नहीं, बल्कि उद्योगों के संचालन के लिए जरूरी सुविधाएं एक ही क्षेत्र में विकसित करने पर भी है।

इसके तहत प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं, स्पष्ट भूमि स्वामित्व, पूर्व-स्वीकृत औद्योगिक भूमि उपयोग, सिंगल-विंडो सहायता और बेहतर सड़क संपर्क जैसी व्यवस्थाओं पर ध्यान दिया जा रहा है।

इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में तैयार फैक्टरी शेड, गोदाम, लॉजिस्टिक्स सुविधाएं, कर्मचारी आवास, अस्पताल, व्यावसायिक केंद्र, कौशल विकास केंद्र और स्टार्टअप एवं इन्क्यूबेशन सुविधाएं विकसित करने की योजना भी इस रणनीति का हिस्सा है।

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