हरियाणा में टैक्स की दर नहीं, बढ़ेगा कर आधार: नायब सैनी ने बताया 2047 तक राजस्व बढ़ाने का रोडमैप

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य की वित्तीय क्षमता मजबूत करने के लिए टैक्स की दरों में बढ़ोतरी के बजाय कर आधार का विस्तार, बेहतर अनुपालन, राजस्व रिसाव पर नियंत्रण और तकनीक के इस्तेमाल पर जोर देने की रणनीति सामने रखी है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ईमानदारी से टैक्स देने वाले लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना राज्य के अपने राजस्व को बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री बुधवार को विकसित हरियाणा-2047 के विजन के तहत ‘हरियाणा की अपनी कर-राजस्व व्यवस्था’ के विश्लेषण और मजबूती को लेकर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। सम्मेलन का आयोजन स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट (SJHIFM) की ओर से किया गया।
कार्यक्रम में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन समेत वित्त एवं कर प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए।
अप्रैल से अगस्त तक SGST में 29 फीसदी उछाल
मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में राज्य के SGST संग्रह के आंकड़े भी साझा किए। उनके मुताबिक चालू वित्त वर्ष के अप्रैल से अगस्त के बीच हरियाणा का SGST संग्रह 29 प्रतिशत बढ़कर 24,662 करोड़ रुपये हो गया है।
पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में राज्य को SGST से 19,174 करोड़ रुपये मिले थे। मुख्यमंत्री के अनुसार अगस्त 2026 में भी हरियाणा के SGST संग्रह में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई, जबकि इस दौरान राष्ट्रीय औसत वृद्धि 13 प्रतिशत रही।
इन आंकड़ों को राज्य के कर संग्रह में बढ़ती गतिविधियों के संकेत के रूप में सरकार की ओर से प्रस्तुत किया गया।
2030 तक 10% और 2047 तक 15% का लक्ष्य
नायब सैनी ने कहा कि हरियाणा का अपना कर-राजस्व फिलहाल राज्य की अर्थव्यवस्था के आकार यानी GSDP के मुकाबले 7 प्रतिशत से कम है। सरकार ने इसे 2030 तक 10 प्रतिशत और 2047 तक 15 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य को टैक्स की दर बढ़ाकर हासिल करने की योजना नहीं है। इसके लिए मौजूदा कर व्यवस्था की क्षमता और कवरेज बढ़ाने, नए करदाताओं को व्यवस्था से जोड़ने, अनुपालन सुधारने तथा राजस्व हानि रोकने पर ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने इस रणनीति को संक्षेप में “दर नहीं, आधार बढ़ाना है; बोझ नहीं, अनुपालन बढ़ाना है” के रूप में रखा।
आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से बढ़ेगा टैक्स बेस
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा की अर्थव्यवस्था में कृषि के साथ उद्योग और सेवा क्षेत्रों की हिस्सेदारी लगातार महत्वपूर्ण हो रही है। गुरुग्राम में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक सेवाओं का विस्तार हो रहा है।
इसके अलावा गन्नौर का इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट, आईएमटी खरखौदा में ऑटोमोबाइल क्षेत्र से जुड़े निवेश तथा रेवाड़ी और हिसार समेत अन्य क्षेत्रों में औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स परियोजनाओं को आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से जोड़ा गया।
राज्य सरकार की औद्योगिक नीतियों में भी निवेश, रोजगार और नए आर्थिक क्षेत्रों को बढ़ावा देने का रोडमैप शामिल है।
ज्यादा राजस्व का उद्देश्य बेहतर सार्वजनिक सेवाएं
नायब सैनी ने कहा कि राजस्व बढ़ाने का मकसद सिर्फ सरकारी खजाने में अधिक पैसा जुटाना नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार मजबूत राजस्व व्यवस्था से सड़क, स्कूल, अस्पताल और अन्य सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी।
उन्होंने करदाताओं के लिए नियमों और प्रक्रियाओं को स्पष्ट, सरल और पारदर्शी बनाने पर भी जोर दिया। सरकार की रणनीति में तकनीक के माध्यम से कर प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने की बात कही गई है।
पुराने टैक्स विवादों के निपटारे पर भी फोकस
मुख्यमंत्री ने पुराने लंबित कर मामलों के समाधान के लिए लागू ‘हरियाणा एकबारगी व्यवस्थापन स्कीम-2026’ का भी उल्लेख किया। सरकार ने इस योजना का उद्देश्य पुराने विवादों का निपटारा कर लंबे समय से चल रही मुकदमेबाजी को कम करना बताया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2025 में करीब 1.15 लाख व्यापारियों ने ऐसी योजना का लाभ लिया था।
मुख्यमंत्री के अनुसार व्यापारियों की सुविधा के लिए इस वर्ष योजना की अवधि बढ़ाकर 30 नवंबर तक करने की जानकारी सम्मेलन में दी गई।
Paperless Registration 2.0 से डिजिटल होगा राजस्व प्रशासन
मुख्यमंत्री ने ‘Paperless Registration 2.0’ और ‘Auto Mutation System’ का भी जिक्र किया। इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य संपत्ति पंजीकरण और इंतकाल से जुड़ी प्रक्रियाओं को डिजिटल और समयबद्ध बनाना है।
हरियाणा सरकार ने जून 2026 में इन दोनों व्यवस्थाओं को लॉन्च करते हुए बताया था कि लोगों को म्यूटेशन के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी और संबंधित दस्तावेज ऑनलाइन डाउनलोड किए जा सकेंगे।
2047 के विजन से जुड़ा है राजस्व सुधार
हरियाणा सरकार के व्यापक ‘विकसित हरियाणा-2047’ रोडमैप में आर्थिक विकास, उद्योग, निवेश और रोजगार के साथ वित्तीय क्षमता बढ़ाने को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार पहले ही विभिन्न विभागों के लिए 2030-31 तक चरणबद्ध रोडमैप तैयार करने की दिशा में काम कर रही है।
राजस्व व्यवस्था में प्रस्तावित बदलावों का मुख्य फोकस टैक्स की दर बढ़ाने के बजाय अधिक व्यापक कर आधार, बेहतर अनुपालन और कम राजस्व रिसाव पर है।
मुख्य बातें
- अप्रैल-अगस्त में SGST संग्रह 24,662 करोड़ रुपये बताया गया।
- इसी अवधि में SGST संग्रह में 29% वृद्धि का दावा।
- 2030 तक अपने कर-राजस्व को GSDP के 10% तक ले जाने का लक्ष्य।
- 2047 तक इसे 15% तक पहुंचाने का लक्ष्य।
- टैक्स दर बढ़ाने के बजाय कर आधार विस्तार पर जोर।
- बेहतर अनुपालन और राजस्व हानि रोकने की रणनीति।
- पुराने कर विवादों के निपटारे के लिए OTS-2026 पर जोर।
- Paperless Registration 2.0 और Auto Mutation से डिजिटल प्रशासन को बढ़ावा।
क्या होगा असर?
राज्य सरकार की इस रणनीति का केंद्र कर दरों में वृद्धि के बजाय करदाताओं की संख्या और अनुपालन बढ़ाना है। यदि प्रस्तावित सुधार प्रभावी तरीके से लागू होते हैं, तो सरकार के अनुसार इससे राजस्व संग्रह की क्षमता बढ़ सकती है और सार्वजनिक सेवाओं के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
हालांकि 2030 और 2047 के राजस्व लक्ष्य दीर्घकालिक सरकारी लक्ष्य हैं। इनकी प्राप्ति आर्थिक वृद्धि, कर आधार के विस्तार, अनुपालन और राजस्व प्रशासन की प्रभावशीलता जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।



