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आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने पर आचार्य मनीष जी का जोर, बोले- स्वस्थ भारत के लिए जागरूकता जरूरी

डेराबस्सी के HIIMS–जीना सीखो हॉस्पिटल्स में मीडिया से अनौपचारिक संवाद, आयुर्वेद, भारतीय चिकित्सा परंपरा और सामाजिक पहलों पर हुई चर्चा

डेराबस्सी, 4 नवंबर 2026: आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने और भारत को स्वस्थ बनाने की दिशा में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत पर आचार्य मनीष जी ने जोर दिया। डेराबस्सी स्थित HIIMS–जीना सीखो हॉस्पिटल्स में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने आयुर्वेद, भारतीय चिकित्सा परंपरा और आधुनिक जीवनशैली में इसकी भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे।

मीडिया प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में आचार्य मनीष जी ने कहा कि आयुर्वेद भारत की समृद्ध ज्ञान और चिकित्सा परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे सिर्फ एक उपचार पद्धति के रूप में नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली और समग्र स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी समझने की जरूरत है।

आयुर्वेद को आम लोगों तक पहुंचाने पर जोर

आचार्य मनीष जी ने कहा कि आयुर्वेद के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना समय की आवश्यकता है। इसके प्रचार-प्रसार के साथ लोगों तक सही जानकारी पहुंचनी चाहिए और इसे वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय चिकित्सा पद्धतियों से समाज के हर वर्ग को जोड़ने के प्रयासों पर भी चर्चा की।

मीडिया के सवालों के दिए जवाब

कार्यक्रम के दौरान मीडिया प्रतिनिधियों ने आयुर्वेद, स्वास्थ्य जागरूकता, पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों और सामाजिक सरोकारों से जुड़े सवाल पूछे। खुले संवाद में आचार्य मनीष जी ने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिया और अपने विचार साझा किए।

सामाजिक पहलों और स्वस्थ जीवनशैली पर चर्चा

आचार्य मनीष जी ने अपनी ओर से संचालित विभिन्न सामाजिक पहलों और जनकल्याणकारी गतिविधियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए केवल चिकित्सा सुविधाएं ही नहीं, बल्कि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और बेहतर जीवनशैली अपनाने की समझ विकसित करना भी जरूरी है।

उन्होंने स्वस्थ भारत और आयुर्वेदिक भारत की परिकल्पना को आगे बढ़ाने पर जोर देते हुए सामूहिक भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।

कार्यक्रम का आयोजन HIIMS–जीना सीखो हॉस्पिटल्स की ओर से किया गया। इसका उद्देश्य मीडिया के साथ सीधा संवाद स्थापित करना और आयुर्वेद, भारतीय चिकित्सा परंपरा तथा सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़े विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान करना रहा।

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