
चंडीगढ़, 19 सितंबर। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में कृषि और किसानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा का वित्तपोषण’ सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने हरियाणा की कृषि प्राथमिकताओं और भविष्य की वित्तीय जरूरतों को सामने रखा। यह सम्मेलन 18 और 19 सितंबर को केंद्र और राज्यों के बीच विकास एवं वित्तपोषण से जुड़ी रणनीतियों पर चर्चा के लिए आयोजित किया गया था।
मुख्यमंत्री ने सम्मेलन के आयोजन के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का आभार जताते हुए कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर नीतिगत समन्वय और वित्तीय सहयोग जरूरी है।
प्राकृतिक खेती और जल सुरक्षा पर विशेष पैकेज की मांग
सीएम सैनी ने हरियाणा के लिए ‘एकीकृत प्राकृतिक खेती और जल सुरक्षा फंडिंग पैकेज’ उपलब्ध कराने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि राज्य में प्राकृतिक खेती का विस्तार करने के साथ-साथ भूजल स्तर में सुधार, वर्षा जल संचयन और सूक्ष्म सिंचाई जैसी तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर निवेश की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री के अनुसार हरियाणा में वर्ष 2026-27 के दौरान प्राकृतिक और जैविक खेती का क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में करीब चार गुना बढ़कर लगभग 50 हजार एकड़ तक पहुंचने का अनुमान है। सरकार ने वर्ष 2030-31 तक इसे बढ़ाकर 1.50 लाख एकड़ करने का लक्ष्य रखा है।
उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र में करीब 2 हजार एकड़ का प्राकृतिक खेती मॉडल क्लस्टर विकसित किया जा रहा है। वहीं मोरनी ब्लॉक को प्राकृतिक सब्जियों के उत्पादन के मॉडल क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना है।
केंद्र की योजनाओं को एकीकृत वित्तीय ढांचे से जोड़ने का सुझाव
मुख्यमंत्री ने केंद्र से आग्रह किया कि प्राकृतिक खेती, जल संरक्षण और सिंचाई से जुड़ी विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के संसाधनों को एक साझा वित्तीय ढांचे में जोड़ा जाए। उनका कहना है कि इससे हरियाणा की परिस्थितियों के अनुरूप एक विशेष केंद्र प्रायोजित वित्तीय पैकेज तैयार किया जा सकता है।
सम्मेलन में कृषि परिवर्तन और ऊर्जा संक्रमण जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के अनुसार सम्मेलन का उद्देश्य राज्यों के साथ मिलकर विकसित भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा के लिए वित्तीय जरूरतों और नीतिगत प्राथमिकताओं पर विचार करना था।
‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ से खाद वितरण में मदद का दावा
मुख्यमंत्री ने ‘मेरी फसल-मेरा ब्यौरा’ पोर्टल का उल्लेख करते हुए कहा कि खाद की जरूरत को किसानों के रिकॉर्ड से जोड़ने से मांग के अनुरूप खाद उपलब्ध कराने में मदद मिली। उनके मुताबिक इससे केंद्र सरकार को लगभग 900 करोड़ रुपये की खाद सब्सिडी बचाने में मदद मिली।
उन्होंने किसान उत्पादक संगठनों यानी FPOs को मजबूत करने की जरूरत पर भी जोर दिया और बताया कि हरियाणा में इस दिशा में एफपीओ मिशन शुरू किया गया है।
करीब 6 लाख एकड़ भूमि में सेम की समस्या का मुद्दा भी उठाया
सीएम सैनी ने हरियाणा के कई क्षेत्रों में जलभराव और सेम की समस्या का भी मुद्दा सम्मेलन में उठाया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 6 लाख एकड़ भूमि इस समस्या से प्रभावित है। ऐसे क्षेत्रों के लिए जल प्रबंधन और भूजल सुधार से जुड़े उपायों को वित्तीय सहयोग के साथ आगे बढ़ाने की जरूरत बताई गई।
सौर और ग्रीन एनर्जी पर भी चर्चा
सम्मेलन के दौरान सौर ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने पर भी विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में स्वच्छ विकल्पों का विस्तार आने वाले समय में विकास की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सम्मेलन में हुई चर्चाओं और सुझावों के आधार पर केंद्र तथा राज्यों के बीच बेहतर वित्तीय समन्वय विकसित होगा और विभिन्न क्षेत्रों में विकास योजनाओं को गति मिलेगी।
हरियाणा के लिए क्या हो सकता है असर?
यदि प्राकृतिक खेती, भूजल रिचार्ज, वर्षा जल संचयन और सूक्ष्म सिंचाई के लिए केंद्र से विशेष वित्तीय सहयोग मिलता है, तो हरियाणा में कृषि के साथ जल प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं को अतिरिक्त संसाधन मिल सकते हैं। खास तौर पर सेम प्रभावित क्षेत्रों में जल प्रबंधन और टिकाऊ कृषि तकनीकों के विस्तार पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, प्रस्तावित पैकेज और उसके वित्तीय स्वरूप पर अंतिम निर्णय केंद्र सरकार के स्तर पर होना बाकी है।



